Media बाहर से ग्लैमर, अंदर से सख्त संघर्ष – मीडिया इंडस्ट्री का असली चेहरा!
Media इंडस्ट्री का नाम सुनते ही दिमाग में एक चमकदार करियर, लाइमलाइट और पॉपुलैरिटी की तस्वीर बनती है। लेकिन अगर आप वाकई इस दुनिया में कदम रखने की सोच रहे हैं, तो पहले यह ज़रूर समझ लें कि यह करियर बाहर से जितना शानदार दिखता है, अंदर से उतना ही चुनौतीपूर्ण और असहज है।
जॉब से जुड़ी कुछ सच्चाइयाँ, जो आपको चौंका सकती हैं
अपनी रीढ़ की हड्डी को भूल जाइए:-अगर आप अपनी बात तर्क के साथ रखने में विश्वास रखते हैं और सही-गलत की परवाह करते हैं – तो मीडिया आपके लिए नहीं है। यहां सफल वही होता है जो बॉस की “हां में हां मिलाना जानता हो
छुट्टियों का सपना छोड़ दें:-मीडिया एक 24×7 इंडस्ट्री है। होली हो या दिवाली, स्वतंत्रता दिवस हो या रविवार – काम कभी रुकता नहीं। यहां छुट्टियों की कोई गारंटी नहीं होती।
चापलूसी – करियर की सबसे ज़रूरी स्किल:-अगर आप प्रमोशन चाहते हैं, बॉस का फेवरेट बनना चाहते हैं, तो आपको चापलूसी करनी आनी चाहिए। स्किल्स से ज्यादा ज़रूरी है ‘Yes Sir’ कहना
पहले दिन से रिटायरमेंट की प्लानिंग शुरू करें:-अगर आप ईमानदारी से काम करते हैं, रीढ़ सीधी रखकर सिस्टम से टकराने की हिम्मत रखते हैं – तो जान लें कि यह इंडस्ट्री आपको जल्दी थका देगी। ऐसे में जरूरी है कि शुरुआत से ही अपना रिटायरमेंट फंड बनाना शुरू कर दें
Media में करियर की सोच रहे युवाओं के लिए जरूरी सलाह
बिना शर्त काम करने की मानसिकता रखें
बॉस के आदेशों को अंतिम समझें
पर्सनल लाइफ को करियर के नीचे रखें
मानसिक और भावनात्मक रूप से मज़बूत बनें
लंबी रेस का घोड़ा बनने के लिए पॉलिटिक्स को समझेंl
Glamour ke peeche ka pressure:
TV ya digital screen pe jitne log dikhte hain, unke peeche ek heavy pressure hota hai – deadlines, TRP pressure, field reporting in extreme conditions, aur kabhi-kabhi physical risk bhi.
Har breaking news ke peeche 18-20 ghante ka kaam hota hai.
Low Salary, High Expectations:
Starting salary journalism mein kaafi low hoti hai – ₹8,000 to ₹20,000 per month. Lekin expectations hoti हैं 24×7 available रहने की, multi-tasking करने की aur social media par bhi active रहने की।
“Passion se kaam chalega, par kiraya usse nahi bharega!” – एक पुराने रिपोर्टर का दर्द.
Job Security aur Political Pressure:
Media houses par political aur corporate pressure kaafi hota है। Bahut baar sach likhne-par https://janmatexpress.com/category/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4/ chali jaati है।
Freelance journalists ke liye toh aur bhi tough hai – koi fixed income नहीं, कोई support नहीं।
Media me Growth Slow Hai, लेकिन Possible Hai:
Agar aapka passion strong hai aur aap real journalism mein believe karte हैं, toh long-term growth मिल सकती है। Lekin shortcut yahan काम नहीं करता।
आपका करियर, आपकी समझदारी से तय होता है। अगर आप खुद को इस तेज़, चुनौतीपूर्ण और कभी न रुकने वाली दुनिया के लिए तैयार मानते हैं, तभी इस दिशा में कदम बढ़ाएं।
#मीडिया_करियर #CareerInMedia #JobAlert #MediarReality #JournalismJobs #TrendingAdvice #MediaTruth #MediaCareer2025
👉 Join the Janmat Express Team Now – Become a voice that matters in digital journalism.
HR क्या सच में कुछ नहीं करता? इस सवाल के पीछे की पूरी सच्चाई जानने के लिए यहाँ क्लिक करें और समझें HR का असली चेहरा।


