दरोगा 15 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तारधारा बढ़ाने के लिए माँगी थी रकम, अब खुद जेल जाने की आई बारी
उत्तर प्रदेश की धरती पर जहां एक ओर शासन भ्रष्टाचारमुक्त व्यवस्था की बात करता है, वहीं दूसरी ओर कुछ वर्दीधारी ऐसे भी हैं जो इस संकल्प को दागदार बना देते हैं। झांसी के मऊरानीपुर थाने में तैनात एक दरोगा को एंटी करप्शन टीम उत्तर प्रदेश ने ₹15,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है।
क्या है मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दरोगा महोदय ने एक मुकदमे में “धारा बढ़ाने” के एवज में पीड़ित पक्ष से ₹15,000 की मांग की थी। शिकायतकर्ता ने बहादुरी दिखाते हुए एंटी करप्शन हेल्पलाइन नंबर 9454402484 पर संपर्क किया और पूरी कार्यवाही की सूचना दी। योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया गया और रिश्वत लेते ही दरोगा को रंगे हाथों धर दबोचा गया।
अब दरोगा पर ही लगेगीं धाराएं!
जिसने कानून की धाराओं को अपनी मर्जी से तोलने की कोशिश की, अब वही दरोगा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत खुद मुकदमे का सामना करेगा। बताया जा रहा है कि गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
जब कानून के रक्षक बन जाएं लुटेरे…
उत्तर प्रदेश की वीरभूमि पर, जहां रानी लक्ष्मीबाई की तलवार गूंजती थी, वहीं आज वर्दीधारी हाथों में नोटों की खनक सुनाई देने लगी है।
कहानी आज की नहीं, बरसों से पल रही एक परछाई की है — वो काली छाया जो वर्दी की गरिमा को हर दिन लज्जित करती रही है।
मऊरानीपुर: झांसी की धरती और ₹15,000 की बोली
10 जुलाई 2025, एक साधारण दिन था। झांसी के मऊरानीपुर थाने में तैनात दरोगा विनीत कुमार ने एक पीड़ित से FIR में “धारा बढ़ाने” के नाम पर ₹15,000 की मांग की। पीड़ित ने डरने की बजाय साहस दिखाया — और 9454402484 (एंटी करप्शन हेल्पलाइन) पर फोन मिला दिया।
जाल बिछा… रुपये थमाए गए… और वर्दी में छिपा दलाल रंगे हाथों पकड़ा गया।
अब वही दरोगा, जो दूसरों पर धाराएं लगवाता था, खुद पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत मुकदमा झेल रहा है।
पर ये पहला मामला नहीं है… चलिए इतिहास की गलियों में झांकते हैं।
मिर्जापुर: थानेदार की थाली में रिश्वत की रोटियाँ
28 फरवरी 2025 — चिल्ह थाना के SO शिवशंकर सिंह पर जब ₹30,000 की रिश्वत लेते हुए हाथ डाला गया, तो उनकी आँखों में हैरानी नहीं, बल्कि आदत की धुन थी।
सिस्टम जानता था, लेकिन अब जनता भी जाग चुकी थी।
मेरठ: दरोगा शनि सिंह का ‘काला शनिवार’
22 मई 2025 — रोहटा थाना में तैनात शनि सिंह, एक फौजी की बेटी के केस में ₹1.5 लाख की मांग करते पकड़े गए।
शर्म की बात ये कि जो देश की रक्षा कर रहा था, उसके परिवार से ही “कानूनी राहत” के नाम पर फिरौती मांगी जा रही थी।
सहारनपुर: इंसाफ की देवी को बिकता देखा
दरोगा अमृता यादव, 2017 में रिश्वत लेते पकड़ी गईं। केस चला, और 2025 में 7 साल की सजा व ₹75,000 जुर्माने के साथ सेवा से बर्खास्त।
नारी शक्ति की बात करने वाली ये दरोगा, अपने कर्मों से नारी मर्यादा को ही दागदार कर बैठीं।
मुंबई: शिवाजी नगर का बापूराव देशमुख
भले ही उत्तर प्रदेश की बात हो रही हो, लेकिन देश की राजधानी मुंबई भी इससे अछूती नहीं।
15 मई 2025 को शिवाजी नगर के PI बापूराव देशमुख ₹1 लाख की रिश्वत लेते पकड़े गए — मामला स्कूल पर अतिक्रमण से जुड़ा था।
क्या ये केवल घटनाएँ हैं? या एक सामाजिक रोग का लक्षण?
हर रिश्वतखोरी का मामला केवल भ्रष्टाचार नहीं — यह जनविश्वास की हत्या है।
जब आम आदमी न्याय की आस लिए थाने जाता है, और वहाँ उसे कानून की कीमत चुकानी पड़े — तब वह देशभक्ति, संविधान और नैतिकता, सब पर सवाल करता है।
रिश्वत मांगने पर डरें नहीं, रिपोर्ट करें
यदि कोई इंस्पेक्टर, दरोगा या सिपाही आपसे रिश्वत मांगता है, तो मना न करें। केवल इतना कहें कि “थोड़ी देर में लेकर आ रहे हैं” और फिर तुरंत कॉल करें इस नंबर पर — 9454402484 एंटी करप्शन टीम उत्तर प्रदेश का नबर तुरंत सक्रिय होकर जाच करती है

