रिपोर्ट: Lucifer Singh | Janmat Express विशेष
हर इस्तीफ़ा कागज़ पर नहीं होता
आज के दौर में कर्मचारियों का मानसिक रूप से “कंपनी से कट जाना” एक खतरनाक ट्रेंड बन चुका है।
यहां तक कि वे ऑफिस रोज आते हैं, मीटिंग में शामिल होते हैं, रिपोर्ट सबमिट करते हैं — लेकिन अंदर ही अंदर वे अपनी कंपनी, काम और उद्देश्य से पूरी तरह दूर हो चुके होते हैं।
इसी को आज कॉर्पोरेट दुनिया में “Silent Resignation” कहा जा रहा है — एक चुपचाप होती हुई विदाई।
क्या होता है Silent Resignation?
Silent Resignation वह प्रक्रिया है जिसमें कर्मचारी बिना आधिकारिक तौर पर इस्तीफ़ा दिए, मानसिक व भावनात्मक रूप से काम से कटने लगते हैं।
इसका मतलब है:
- वे अब अपने काम में रुचि नहीं लेते
- टीम मीटिंग्स में निष्क्रिय रहते हैं
- न्यूनतम अपेक्षित काम करते हैं
- सहयोगी संवाद में रूचि नहीं रखते
- और सबसे अहम – वे ‘क्यों’ भूल चुके हैं
“मैं यह काम क्यों कर रहा हूँ?”
“इसका मकसद क्या है?”
“क्या मेरा योगदान मायने रखता है?”
जब ये सवालों के जवाब नहीं मिलते, Silent Resignation की शुरुआत होती है।
लक्षण: कैसे पहचानें कि कोई कर्मचारी ‘चुपचाप इस्तीफ़ा’ दे चुका है?
- व्यवहार में बदलाव: पहले जो व्यक्ति टीम लीड करता था, अब चुपचाप बैठा रहता है
- सक्रिय भागीदारी की कमी: मीटिंग्स में मौजूद तो है, लेकिन बोलता नहीं
- रचनात्मक सुझावों का अंत: पहले जो सुझाव देता था, अब ‘जो है ठीक है’ वाली मानसिकता
- ऑफिस टाइमिंग से ठीक-ठाक बाहर: न देर से आता, न रुकता – बस समय काट रहा है
- लक्ष्यों के प्रति तटस्थता: टारगेट पाना या चूकना, दोनों में भावशून्यता
Silent Resignation क्यों होता है?
1. नेतृत्व की असंवेदनशीलता
जब टीम लीडर्स या मैनेजमेंट बार-बार कर्मचारियों की बातों को अनदेखा करते हैं, तो धीरे-धीरे कर्मचारी महसूस करता है कि उसकी कोई अहमियत नहीं।
2. पहचान और सराहना की कमी
कर्मचारी मेहनत करता है, लेकिन अगर उसका कोई मूल्यांकन या सराहना नहीं होती, तो वह “केवल एक नंबर” की तरह महसूस करने लगता है।
3. विषैली कार्य-संस्कृति
जब टॉक्सिक सहकर्मियों को संरक्षित किया जाता है, और ईमानदार लोगों को टारगेट किया जाता है, तो अच्छे कर्मचारी चुपचाप पीछे हटने लगते हैं।
4. कार्य और उद्देश्य के बीच असंतुलन
अगर कर्मचारियों को यह महसूस नहीं होता कि उनका काम किसी बड़े उद्देश्य से जुड़ा है, तो काम एक बोझ बन जाता है।
5. Burnout और मानसिक थकान
लगातार डेडलाइन्स, बिना ब्रेक के काम, और निजी जीवन का संतुलन बिगड़ना — ये सभी कर्मचारी को भीतर से थका देते हैं।
Silent Resignation क्यों खतरनाक है?
- टीम की ऊर्जा पर असर: निष्क्रिय सदस्य बाकी टीम का मनोबल गिराते हैं
- संस्कृति में दरार: जब काम मन से नहीं होता, तो संस्थान की संस्कृति खोखली होती है
- उत्पादन क्षमता कम होती है: कर्मचारी काम करता है, लेकिन “बस जैसे-तैसे”
- नई प्रतिभा को हतोत्साहित करता है: नये लोग जब ऐसी निष्क्रियता देखते हैं, तो वे प्रेरणा नहीं लेते
क्या करें एक अच्छा लीडर?
- सुनना सीखिए
नियमित One-on-One बातचीत कीजिए। केवल KPI या टारगेट की नहीं, उनके अनुभव की भी चर्चा होनी चाहिए। - प्रशंसा की संस्कृति बनाइए
हर छोटे-बड़े प्रयास की खुले मंच पर सराहना करें। - कार्य के उद्देश्य को दोहराइए
हर टीम मीटिंग में बताइए कि आपका काम कैसे कंपनी के विज़न से जुड़ता है। - फीडबैक को प्रोत्साहित कीजिए
लोगों से पूछिए: “क्या चीज़ आपको पीछे खींच रही है?” — और जवाबों को लागू भी कीजिए। - मेंटल हेल्थ को प्राथमिकता दीजिए
लचीलापन दीजिए, ब्रेक का समर्थन कीजिए, और काम को ‘सिर्फ ड्यूटी’ न बनाइए।
Resignation सिर्फ HR Data नहीं होता
Silent Resignation एक ‘emotionally disengaged workforce’ की निशानी है।
यह संकेत है कि कोई व्यक्ति काम तो कर रहा है, लेकिन उसके भीतर का जुड़ाव टूट चुका है।
नेतृत्व की असली परीक्षा यही है:
क्या आप अपने कर्मचारियों की चुप्पी सुन पा रहे हैं?
Resignation letter आने का इंतजार मत कीजिए।
पहले सवाल पूछिए, बातचीत कीजिए, और उन्हें फिर से जोड़ने की कोशिश कीजिए।

